Wednesday, October 8, 2008

प्रेरणात्मक सूक्तियां--2

ज़िंदगी एक साईकिल चलाने की तरह है आप तब तक नही गिरते जब तक आप उसे चलाना बंद नही करते...

स्कूल और ज़िंदगी में क्या अंतर है?
स्कूल में पहले पाठ पढ़ाया जाता है और फिर टेस्ट लिया जाता है जबकि ज़िंदगी में पहले सेस्ट लेती है और फिर पाठ पढ़ती है...

नामुमकिन काम करना भी एक तरह का मज़ा है..

आप वो हैं जो आप समझते है की आप हैं..

ज़िंदगी में सबसे बड़ा ख़तरा यह है की ख़तरा न लेना...

2 comments:

प्रदीप मानोरिया said...

सुंदर विचार से परिपूर्ण ब्लॉग है आपका | मेरी नई रचना "शेयर बाज़ार पढने हेतु आपको सादर अपने इष्ट मित्रों सहित आमंत्रण है कृपया मेरे ब्लॉग पर पधारें और जाते जाते अपनी प्रित्की\रिया भी व्यक्त करें <> स्वागत है

डा प्रवीण चोपड़ा said...

Raghav, I think you should post regularly and develop your writing craft. I feel there is a great writer in you who wants to come out !!
All the very best to you.